राजस्थान में घूमने के लिए काफी प्राचीन मंदिर हैं, जिनकी अलग-अलग मान्यताएं हैं। ऐसा ही एक मंदिर सांवलिया सेठ मंदिर है, जोकि राज्य के चित्तौड़गढ़ जिले के नजदीक स्थित है। भगवान कृष्ण को समर्पित सांवलिया सेठ मंदिर, चित्तौड़गढ़ से लगभग 40 किलोमीटर की दूरी पर है। भादसोरा शहर के पास चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग पर यह चमत्कारी मंदिर स्थित है। आइए इस आर्टिकल में सांवलिया सेठ मंदिर का इतिहास, मंदिर में दर्शन करने का समय, समेत अन्य जानकारी के बारे में जानते हैं।

सांवलिया सेठ मंदिर की जानकारी

सांवलिया सेठ मंदिर का इतिहास व कहानी: राजस्थान के सांवलिया सेठ मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। मंदिर के पीछे एक एतिहासिक कहानी जुड़ी हुई है, जिसमें बताया जाता है कि वर्ष 1840 में, भोलाराम गुर्जर नाम के एक दूधवाले ने रात को सपने में देखा की भादसोरा-बागुंड के छापर गाँव में तीन दिव्य मूर्तियाँ जमीन के अंदर दबी हुई हैं। यह बात भोलाराम ने गांव के अन्य व्यक्तियों को बताई और ग्रामीणों ने उस स्थान की खुदाई प्रारम्भ कर दी।

sawariya seth mandir Rajasthan

इस खुदाई के दौरान उन्हे भगवान कृष्ण की तीन उत्कृष्ट मूर्तियाँ मिली, प्रत्येक मूर्ति मनोरम और सुंदर थीं। इन मूर्तियों को तीन अलग-अलग स्थानों पर रखा गया था। मंडफिया, भादसोड़ा, और मूल स्थान जहां मूर्ती पाई गई थी। मंडफिया के ग्राम प्रधान श्री रोडूलालजी जैन ने चार दीवारों और एक छाया वाले एक साधारण मंदिर का निर्माण करवाया, इसमें एक मूर्ती को स्थापित किया गया था। समय के साथ, सांवलिया जी को समर्पित तीनों मंदिरों को प्रमुखता मिली, जिससे बड़ी संख्या में श्रद्धालु आकर्षित हुए।

सांवरिया सेठ मंदिर की महत्वता

सांवरिया सेठ मंदिर में हमें भगवान श्रीकृष्ण की एक भव्य काले पत्थर की मूर्ति देखने को मिलती है। भक्त भगवान श्रीकृष्ण के पवित्र दर्शन के लिए इस मंदिर में प्रतिदिन आते हैं। इस प्रतिष्ठित मंदिर के अंदर जन्माष्टमी और अन्य प्रमुख हिंदू त्योहारों को बहुत ही खुशी से और भव्य तरीकों से मनाया जाता है। सांवलिया सेठ मंदिर बहुत ही गहरा आध्यात्मिक महत्व रखता है और भक्तों को भगवान कृष्ण से आशीर्वाद लेने के लिए आकर्षित करता है।

सांवरिया सेठ मंदिर का चमत्कार

सांवरिया सेठ मंदिर के चमत्कार के बारे में बात की जाए तो एक बार साल 1992 में तत्कालीन मुख्यमंत्री माननीय भैरो सिंह शेखावत ने मंडफिया मंदिर का दौरा किया। इस मंदिर में प्रभु श्री सांवलियाजी सेठ की एक दिव्य मूर्ति है। आमतौर पर, भगवान के दर्शन दोपहर 12 बजे से 2:30 बजे तक बंद रहते हैं। लेकिन मुख्यमंत्री ने दोपहर 2 बजे भगवान के दर्शन करने की इच्छा जताई।

मुख्यमंत्री की इच्छा जताने के बाद तुरंत पुजारी को बुलाया गया और गर्भगृह का दरवाजा खोलने को कहा गया, लेकिन वह दरवाजा नहीं खुला और लगातार कोशिश करने के बावजूद भी मंदिर का ताला नहीं टूटा। जब मंदिर खुलने का समय हुआ तब उसी चाबी का उपयोग करके, ताला चमत्कारिक रूप से खुल गया। इस चमत्कार से माननीय शेखावत साहब बहुत ज्यादा ही प्रभावित हुए।

सांवरिया सेठ मंदिर में दर्शन क समय- Sawariya Seth Mandir Timings

दिन

दिन के कुछ भाग

मंदिर दर्शन का समय/अनुसूची

सोम से रवि

मंदिर खुलने का समय

सुबह 05:30 बजे से

सोम से रवि

सुबह का समय

सुबह 05:30 से दोपहर 12:00 बजे तक

सोम से रवि

शाम का समय

दोपहर 2:30 से रात 11:00 तक

सोम से रवि

मंदिर बंद होने का समय

दोपहर 12 से 2:30 तक व रात 11 से सुबह 05:30 बजे तक

 

ध्यान दें: सांवरिया सेठ मंदिर के दर्शन के समय को किसी विशेष पर्व या विशेष दिन के लिए बदला भी जा सकता है।

सांवरिया सेठ मंदिर में आरती का समय- Aarti time in Sanwariya Seth Temple

दिन

मंदिर अनुष्ठान मंदिर आरती का समय/अनुसूची

सोम से रवि

मंगला आरती

सुबह 5:30

सोम से रवि

विश्राम काल (भगवान सांवलिया जी)

दोपहर 12:00 से 2:30 तक
सोम से रवि आरती,फलाहार प्रसाद श्रवेद दर्शन

दोपहर 2:30 बजे से

सोम से रवि

संध्या पूजा

 रात 8:00 से 9:15 बजे तक

सोम से रवि

भजन और कीर्तन

रात 9:15 से 11:00 बजे तक

सांवरिया सेठ मंदिर कहां पर स्थित है- Sawariya Seth Mandir Kaha Hai

सांवलियाजी मंदिर, जिसे पूरे भारतवर्ष में सांवरिया सेठ मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यह मंदिर भारत के राजस्थान राज्य के ऐतिहासिक शहर चित्तौड़गढ़ में चित्तौड़गढ़-उदयपुर राजमार्ग पर स्थित है। यह मंदिर एक बहुत ही महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल माना जाता है। इस मंदिर में हमे भगवान कृष्ण के बाल रूप के दर्शन देखने को मिलते हैं। उनके इस रूप को “सांवरिया सेठ” या “श्याम सेठ” के नाम से जाना जाता है। यह मंदिर भक्तों की इच्छाओं को पूरा करने के लिए काफी अधिक प्रसिद्ध है। इसके वार्षिक त्योहारों में महा-शिवरात्रि, होली, नवरात्रि और राम-नवमी शामिल हैं।

चित्तौड़गढ़ से सांवलिया सेठ मंदिर की दूरी कितनी है

चित्तौड़गढ़ से सांवलिया सेठ मंदिर की दूरी लगभग 40 किलोमीटर है। अगर आप चित्तौड़गढ़ से सांवलिया सेठ मंदिर जाना चाहते हैं, तो आप लोकल बस से या फिर टेक्सी करके इस मंदिर तक पहुँच सकते हैं।

ट्रेन से सांवलिया सेठ मंदिर कैसे पहुंचे

यदि आप किसी बाहरी शहर से आ रहे हैं तो जयपुर, नई दिल्ली, रतलाम, इंदौर, भोपाल, मुंबई, बेंगलुरु, कोलकाता, आगरा और कोटा से दैनिक एक्सप्रेस, सुपरफास्ट ट्रेन चित्तौड़गढ़ तक चलती हैं। आप इन ट्रेन की सहायता से चित्तौड़गढ़ आ सकते हैं। यहां से आप लोकल बस या फिर टेक्सी की मदद से इस मंदिर तक पहुँच सकते हैं।

सांवलिया सेठ मंदिर हवाई जहाज से कैसे आएं

अगर आप सांवलिया सेठ मंदिर हवाई जहाज से आना चाहते हैं, तो इसके लिए सबसे निकटतम हवाई अड्डा महाराणा प्रताप हवाई अड्डा (यूडीआर) व उदयपुर हवाई अड्डा है। इस हवाई अड्डे के लिए मुंबई, दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद, बैंगलोर, पुणे, भोपाल, रायपुर, गोवा और इंदौर जैसे शहरों से दैनिक उड़ानें रहती हैं।

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